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बच्चे तो बच्चे ही हैं…
परिवर्तन कुदरत का नियम है। अगर ऐसा न हो तो सब कुछ ठहर जायेगा कुछ नया नहीं होगा। आज कोरोना महामारी आई है तो जायेगी भी। लेकिन इस महामारी ने बहुत कुछ बदल दिया तो बहुत कुछ सीखा भी दिया। सीखाने से याद आया। कोरोना के समय ज्यादातर खाने-पीने का सामान घर पर ही बनने लगा। नये-नये पकवान बनने लगे तो नयी चीजें बनने लगीं। खाने-पीने के नाम पर कितनी वैरायटियां हो गई हैं। वह अलग बात है कि इस कोरोनाकाल में जिस घर के सदस्य की नौकरी चली गयी उसके घर में चूल्हा जला भी नहीं। या जला भी तो कैसे चला। अभी उस पर बात नहीं करेंगे। ऐसे…


