Religious
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आरती, स्तोत्र और साधना-यात्रा
काफी समय से मैं ब्लॉग पर नियमित रूप से लेख नहीं लिख पा रहा था। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि मैं पिछले कई वर्षों से एक ऐसे धार्मिक ग्रंथ के निर्माण में संलग्न था, जिसमें सभी आरतियाँ और स्तोत्र पूर्णतः शुद्ध, प्रमाणिक और त्रुटिरहित रूप में संकलित किए जा सकें। 📥 आरती संग्रह PDF डाउनलोड करें भारतीय सनातन परंपरा में प्रातःकाल का समय अत्यंत पवित्र माना गया है। प्रत्येक सनातनी व्यक्ति अपने गुरु और ईश्वर का स्मरण कर, आरतियों एवं स्तोत्रों के माध्यम से भक्ति भाव व्यक्त करता है। यह साधना मन को शांति, स्थिरता और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। किन्तु व्यक्तिगत अनुभव में मुझे यह महसूस हुआ कि…
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जहां भाव, वहीं भगवान
एक बार वृंदावन के एक भव्य मंदिर में, अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर एक संत श्री बांके बिहारी जी के चरणों का दर्शन कर रहे थे। उनका मन प्रभु के दर्शन में इतना लीन था कि वे भावविभोर होकर स्वयं को भूल चुके थे। उनकी आंखों से प्रेमाश्रु बह रहे थे, और होंठों पर एक मधुर भाव अनायास ही फूट पड़ा— ‘श्री बिहारी जी के चरण कमल में नयन हमारे अटके, नयन हमारे अटके…’ भक्तिरस से सराबोर वह भाव मंदिर में गुंजायमान हो उठा। उसी समय वहाँ एक सामान्य भक्त भी खड़ा था। वह कोई ज्ञानी, साधक या कवि नहीं था—परंतु उस संत का प्रेममय गान उसके हृदय में…

