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बदलाव के दौर की जेन ज़ी
आज की दुनिया में जेन ज़ी सबसे अधिक चर्चा में रहने वाली पीढ़ियों में से एक है। सोशल मीडिया, स्मार्टफोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप संस्कृति और तेजी से बदलती कार्यशैली ने इस पीढ़ी को समाज के केंद्र में ला खड़ा किया है। लेकिन एक दिलचस्प सवाल यह है कि कुछ वर्ष पहले की युवा पीढ़ी और आज की युवा पीढ़ी में कितना अंतर आ गया है? क्या दोनों की सोच, काम करने का तरीका और जीवन के प्रति नजरिया एक जैसा है, या बदलती तकनीक और परिस्थितियों ने इन्हें अलग बना दिया है? दरअसल, जेन ज़ी को सामान्य रूप से उन लोगों की पीढ़ी माना जाता है जिनका जन्म लगभग 1997…
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सावन को आने दो…
आज जब मैं अपने कंप्यूटर में बैठकर कीबोर्ड पर यह लेख टाइप कर रहा था तो बाहर अचानक बादल गर्जने लगे और थोड़ी देर में झमाझम बारिश होने लगी। शहरों में तो सभी मकान कंक्रीट के हैं। यहां बारिश गिरने का जो दृश्य या आनंद आता है वह नहीं मिलता। खैर, मेरे मकान की निचली मंजिल में बाहर आंगन में लोहे की टीन की छत्त डाल रखी है। जब भी हल्की बारिश शुरू होती है तो छत में गिरती वर्षा की बूंदें एक ध्वनि पैदा करती है जो एक अलग ही आनंद देता है। यूं कह लें बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। समय के साथ बारिश की झमाझम…
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आरती, स्तोत्र और साधना-यात्रा
काफी समय से मैं ब्लॉग पर नियमित रूप से लेख नहीं लिख पा रहा था। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि मैं पिछले कई वर्षों से एक ऐसे धार्मिक ग्रंथ के निर्माण में संलग्न था, जिसमें सभी आरतियाँ और स्तोत्र पूर्णतः शुद्ध, प्रमाणिक और त्रुटिरहित रूप में संकलित किए जा सकें। 📥 आरती संग्रह PDF डाउनलोड करें भारतीय सनातन परंपरा में प्रातःकाल का समय अत्यंत पवित्र माना गया है। प्रत्येक सनातनी व्यक्ति अपने गुरु और ईश्वर का स्मरण कर, आरतियों एवं स्तोत्रों के माध्यम से भक्ति भाव व्यक्त करता है। यह साधना मन को शांति, स्थिरता और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। किन्तु व्यक्तिगत अनुभव में मुझे यह महसूस हुआ कि…
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क्या खो रहे हैं हम?
आज की डिजिटल दुनिया में ‘लाइक’, ‘थम्ब्स अप’ और ‘कमेंट्स’ केवल प्रतिक्रिया के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि कई लोगों के लिए आत्म-सम्मान का पैमाना बन चुके हैं। हम देख रहे हैं कि आज की पीढ़ी सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हो जाती है। फॉलोवर्स बढ़ाने की होड़ में कई बार लोग अपनी असली पहचान, अपने मूल्य और अपनी गरिमा तक दांव पर लगा देते हैं। सवाल यह है कि क्या कुछ सेकंड की वायरल प्रसिद्धि सच में उस कीमत के लायक है? आज का दौर दिखावे का दौर बन गया है। लोग अपने जीवन के हर छोटे-बड़े पल को इस…
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कलाई पर बंधा प्यार
समय के साथ सब कुछ बदलता जा रहा है। पुराने की जगह नया लेता जा रहा है। बाहर से बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन अंदर कहीं कुछ वैसा ही है — या शायद अब वह भी बदलने लगा है। पहले बदलाव सिर्फ बाहरी आवरण तक सीमित थे, अब वे हमारे भावों, हमारे रिश्तों और हमारे जुड़ावों तक पहुंच गए हैं। वो प्यार, वो भावनाएं, वो अपनापन, वो आंतरिक खुशी और जिज्ञासा — अब पहले जैसे नहीं रहे। एक समय था जब बहनें रक्षाबंधन के त्योहार का बेसब्री से इंतजार करती थीं। यह इंतजार केवल शगुन या उपहार के लिए नहीं होता था, बल्कि भाई की कलाई पर राखी बांधने…









