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आरती, स्तोत्र और साधना-यात्रा
काफी समय से मैं ब्लॉग पर नियमित रूप से लेख नहीं लिख पा रहा था। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि मैं पिछले कई वर्षों से एक ऐसे धार्मिक ग्रंथ के निर्माण में संलग्न था, जिसमें सभी आरतियाँ और स्तोत्र पूर्णतः शुद्ध, प्रमाणिक और त्रुटिरहित रूप में संकलित किए जा सकें। 📥 आरती संग्रह PDF डाउनलोड करें भारतीय सनातन परंपरा में प्रातःकाल का समय अत्यंत पवित्र माना गया है। प्रत्येक सनातनी व्यक्ति अपने गुरु और ईश्वर का स्मरण कर, आरतियों एवं स्तोत्रों के माध्यम से भक्ति भाव व्यक्त करता है। यह साधना मन को शांति, स्थिरता और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। किन्तु व्यक्तिगत अनुभव में मुझे यह महसूस हुआ कि…
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क्या खो रहे हैं हम?
आज की डिजिटल दुनिया में ‘लाइक’, ‘थम्ब्स अप’ और ‘कमेंट्स’ केवल प्रतिक्रिया के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि कई लोगों के लिए आत्म-सम्मान का पैमाना बन चुके हैं। हम देख रहे हैं कि आज की पीढ़ी सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हो जाती है। फॉलोवर्स बढ़ाने की होड़ में कई बार लोग अपनी असली पहचान, अपने मूल्य और अपनी गरिमा तक दांव पर लगा देते हैं। सवाल यह है कि क्या कुछ सेकंड की वायरल प्रसिद्धि सच में उस कीमत के लायक है? आज का दौर दिखावे का दौर बन गया है। लोग अपने जीवन के हर छोटे-बड़े पल को इस…
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कलाई पर बंधा प्यार
समय के साथ सब कुछ बदलता जा रहा है। पुराने की जगह नया लेता जा रहा है। बाहर से बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन अंदर कहीं कुछ वैसा ही है — या शायद अब वह भी बदलने लगा है। पहले बदलाव सिर्फ बाहरी आवरण तक सीमित थे, अब वे हमारे भावों, हमारे रिश्तों और हमारे जुड़ावों तक पहुंच गए हैं। वो प्यार, वो भावनाएं, वो अपनापन, वो आंतरिक खुशी और जिज्ञासा — अब पहले जैसे नहीं रहे। एक समय था जब बहनें रक्षाबंधन के त्योहार का बेसब्री से इंतजार करती थीं। यह इंतजार केवल शगुन या उपहार के लिए नहीं होता था, बल्कि भाई की कलाई पर राखी बांधने…
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जहां भाव, वहीं भगवान
एक बार वृंदावन के एक भव्य मंदिर में, अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर एक संत श्री बांके बिहारी जी के चरणों का दर्शन कर रहे थे। उनका मन प्रभु के दर्शन में इतना लीन था कि वे भावविभोर होकर स्वयं को भूल चुके थे। उनकी आंखों से प्रेमाश्रु बह रहे थे, और होंठों पर एक मधुर भाव अनायास ही फूट पड़ा— ‘श्री बिहारी जी के चरण कमल में नयन हमारे अटके, नयन हमारे अटके…’ भक्तिरस से सराबोर वह भाव मंदिर में गुंजायमान हो उठा। उसी समय वहाँ एक सामान्य भक्त भी खड़ा था। वह कोई ज्ञानी, साधक या कवि नहीं था—परंतु उस संत का प्रेममय गान उसके हृदय में…
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सेवा को अभिनंदन
पहली जून, 2022. ‘हेलो भाई! पापाजी की तबीयत ठीक नहीं हैं, अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। तू जल्दी आ जा।’ फोन में ये शब्द किसी को भी विचलित कर सकते हैं। मुझे एक पल कुछ नहीं सूझा कि मैं क्या करूं। शांत मन से दुबारा छोटे भाई को कॉल लगाई तो पता चला कि पिताश्री आईसीयू में भर्ती हैं। मेरा जाना बहुत जरूरी है। मैंने जैसे-तैसे छोटा-मोटा सामान बांधा और सीधा चंडीगढ़ से शिमला की ओर गाड़ी से चल पड़ा। रास्तेभर कई प्रकार की शंकाएं मन को विचलित कर रही थीं। खैर, चार-पांच घंटे के सफर के बाद सीधा अस्पताल जाना हुआ। जहां पिताश्री पलमोनरी विभाग (श्वास संबंधी) में…




