General
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कलाई पर बंधा प्यार
समय के साथ सब कुछ बदलता जा रहा है। पुराने की जगह नया लेता जा रहा है। बाहर से बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन अंदर कहीं कुछ वैसा ही है — या शायद अब वह भी बदलने लगा है। पहले बदलाव सिर्फ बाहरी आवरण तक सीमित थे, अब वे हमारे भावों, हमारे रिश्तों और हमारे जुड़ावों तक पहुंच गए हैं। वो प्यार, वो भावनाएं, वो अपनापन, वो आंतरिक खुशी और जिज्ञासा — अब पहले जैसे नहीं रहे। एक समय था जब बहनें रक्षाबंधन के त्योहार का बेसब्री से इंतजार करती थीं। यह इंतजार केवल शगुन या उपहार के लिए नहीं होता था, बल्कि भाई की कलाई पर राखी बांधने…
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सेवा को अभिनंदन
पहली जून, 2022. ‘हेलो भाई! पापाजी की तबीयत ठीक नहीं हैं, अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। तू जल्दी आ जा।’ फोन में ये शब्द किसी को भी विचलित कर सकते हैं। मुझे एक पल कुछ नहीं सूझा कि मैं क्या करूं। शांत मन से दुबारा छोटे भाई को कॉल लगाई तो पता चला कि पिताश्री आईसीयू में भर्ती हैं। मेरा जाना बहुत जरूरी है। मैंने जैसे-तैसे छोटा-मोटा सामान बांधा और सीधा चंडीगढ़ से शिमला की ओर गाड़ी से चल पड़ा। रास्तेभर कई प्रकार की शंकाएं मन को विचलित कर रही थीं। खैर, चार-पांच घंटे के सफर के बाद सीधा अस्पताल जाना हुआ। जहां पिताश्री पलमोनरी विभाग (श्वास संबंधी) में…

