विद्यालय को नमन
आज मन में विचार आया कि हम आज तक अपनी जिंदगी में स्कूल (ज्ञान का मंदिर) कितने दिन, साल तक गये होंगे? उससे पहले लोअर केजी, एलकेजी फिर प्रथम कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक तो दस-बारह साल हो गये। उसके बाद स्कूल, कॉलेज फिर विश्वविद्यालय तक का सफर। चाहे स्कूल हो, कॉलेज हो या यूनिवर्सिटी, सब ज्ञान के मंदिर ही हैं। यानी कम से कम बीस से पच्चीस साल तो गये ही होंगे। कुछ इससे ज्यादा हो सकते हैं। खैर, यह तो रही स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय की बात। उसके बाद जब आपके भी बच्चे हुए तो उनके साथ आप फिर स्कूल गये होंगे। कभी पीटीएम, कभी फीस के लिए कभी किसी कार्यक्रम में। वह दिन में जोड़ने बाकी हैं। अब बताओ कि आज तक आप कितने दिन मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे गये होंगे? यानी मंदिर से अधिक आप ज्ञान के मंदिर (स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय) में ज्यादा दिन गये। जहां साक्षात़्े गुरु के दर्शन किये। उन्हें प्रणाम किया और आशीर्वाद भी मिला कि आप जिंदगी में निरंतर तरक्की करो।
आप सोच रहे होंगे कि यह कैसा सवाल है? मैं मंदिर और विद्यालय की तुलना नहीं करना चाहता और तुलना हो भी नहीं सकती। दोनों स्थानों की अपनी-अपनी गरिमा, महत्व और श्रद्धा है। बस, मैं इतना कहना चाहता हूं हमने जिंदगी में मंदिर से ज्यादा स्कूल के दर्शन किये हैं। स्कूल जहां हमारा बौद्धिक विकास हुआ। गुरु के महत्व को समझा। हमने दुनिया को समझा, अपने को जाना यानी जो कुछ भी ज्ञान के मंदिर में मिला, आज हम जो कुछ भी हैं, उसी की बदौलत है। यानी एक सभ्य और समझदार बनें। इसलिए स्कूल का महत्व हमारे जीवन में बहुत ज्यादा है। जहां हमने इतने वर्ष गुजारे हैं। जीवन के सफर में आगे भी हम जब दादा-दादी, नाना-नानी बनेंगे तो फिर अपने बच्चों के बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने में हमारी भूमिका होगी। उस समय एक बार फिर आपको स्कूल के दर्शन होंगे। इसी कारण हम सबके लिए स्कूल एक पूजनीय स्थल बन गया।
जब भी मैं अपने स्कूल के पास से गुजरता हूं तो उसे नमन अवश्य करता हूं। एक सुखद अनुभूति होती है, मन को एक असीम शांति मिलती है। क्या आपने कभी अपने स्कूल को नमन किया। कभी स्वयं नमन करके देखें जो आनंद आता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। अब अगली बार जब भी आप अपने स्कूल के पास से गुजरे नमन जरूर करें। उम्मीद है आप ऐसा करेंगे।

