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बड़ा आशियाना, छोटा दायरा

अक्सर देखा होगा कि बड़े-बड़े मकानों के अंदर सजावटी सामान रखा होता है जो देखने में तो अच्छे लगते ही हैं लेकिन हल्का-सा धक्का लगने पर नीचे गिरने पर चकनाचूर हो जाते हैं। महंगा सजावटी सामान मेहमान या आने वालों को दिखाने के लिये ही होता है। घरवाले तो रोज ही देखते हैं। शायद देख-देखकर मन ही मन सुकून भी पाते होंगे। खैर, कौन नहीं चाहेगा कि उसके आशियाने में अच्छा सजावटी सामान भरा हो। देखने वाले उसकी तारीफ में कसीदे कसें। आप उस सामान की कीमत या कहां से मंगाया कैसे मुश्किल से आया इत्यादि का ब्योरा देने में जुट जाते हैं।

चलो, अब मुद्दे की बात पर आयें। घर तो बड़ा, खुला और हवादार है लेकिन भारी-भरकम सामान से उसे इतना भर दिया जाता है कि अब घर में चलने के लिए भी जगह कम पड़ जाती है। कांच का सामान इतने करीने से रखा होता है कि उसके पास जाने पर आपको संभल कर चलना पड़ता है कि कहीं दूसरे सामान को धक्का न लग जाये। आराम से इधर से उधर चलने पर दिक्कत का सामना करना पड़ता है। घर में रहने वाले चार आदमी हैं तो आपने सोफा सेट एक की बजाय चार रख लिये। बेड आपने चार की जगह छह रख लिये। टेबल एक की जरूरत थी तो चार हैं। उसके ऊपर भी ऐसे कांच के महंगे सामान रख दिये कि टेबल टेबल न होकर सामान रखने का रैक बन गया। घर में ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए बड़े ही हिदायतों के साथ गुजरना पड़ रहा है। 

घर तो एक मां का आंचल है जहां घर में रहने वाले सुख की सांसें लेते हैं। मन को एक अलग तरह की शांति मिलती है। जब कोई थक-हारकर घर आता है तो उसे दुनिया का सारा सुख मिलता है। इतना सुकून, शांति मिलती है कि जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वह घर में तनकर, फैलकर रहता है। ऐसे में अगर घर भारी-भरकम सामान, कांच के टुकड़ों से भरा हो, संभल-संभल कर चलता पड़े, उसे वहां फैलकर या तनकर तो दूर की बात केवल अपने तक सीमित होकर ही रहना पड़े तो उस घर का बड़ा होने के क्या मायने रह जाते हैं। शायद हमने अपनी दिक्कतों को और बढ़ा दिया। फिर मन में, किसी सामान का टूटने का डर सताये, वह अलग बात है। क्या यह घर में सुकून की जिंदगी हो सकती है? सामान उतना ही घर में ठीक रहता है, जितने की जरूरत है। बच्चे घर में इधर से उधर दौड़ नहीं सकते, आप को स्वयं संभल-संभल कर चलना है। घर में हिदायतों का पालन करना पड़ रहा है। इधर मत जाओ, उधर मत जाओ, सामान गिर जायेगा, टूट जायेगा। आराम से बैठो, हाथ मत हिलाओ। इसे हाथ मत लगाओ। क्या आप इसे पसंद करेंगे? घर को घर ही रहने दिया जाये तो ही बेहतर, न कि स्टोर रूम बना दिया जाये। बाकी आप समझदार तो हैं ही।

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