प्रकृति में सुकून…
कोरोना ने ऐसी जिंदगी बदली की जो जहां खड़ा था, उसे पीछे धकेल दिया। खैर, लंबे समय के बाद शिमला जाना हुआ। खूबसूरत पहाड़ी प्रदेश में पहुंचकर ऐसा लगा जैसे सारे बंधन तोड़कर खुली हवा में सांस ले रहा हूं। शरीर में एक नयी ऊर्जा का संचार हुआ। खुला-खुला वातावरण तो थोड़ा-थोड़ा ठंड का अहसास। फरवरी का दूसरा सप्ताह था। बर्फ तो कहीं नजर नहीं आयी लेकिन जो सुकून इस पहाड़ों में मिला, उसे शब्दों में बयां तो बिल्कुल नहीं किया जा सकता।
बहती हुई हवा और साथ में सांय-सांय करते ऊंचे-ऊंचे देवदार के वृक्ष एक अलग आनंद का अहसास करा रहे थे। पूरा वातावरण अलग संगीतमय तान छेड़ रहा था। बाहों को फैलाकर बस इन हवाओं में उड़ने को दिल कर रहा था। दिल-दिमाग से सारा बोझ उतर गया। कोरोना के कारण घरों में कैद के बाद आज़ादी का अहसास हुआ। ज्यादातर समय प्रकृति को ही निहारा। शिमला तो नहीं घूमा लेकिन आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य को खूब निहारा। हां, शिमला जाते समय पहाड़ों के सीने को चीरते हुए खुली सड़कों ने समय को तो कम कर दिया लेकिन दुख भी हुआ कि सड़कों के निर्माण में कितने वृक्षों की बलि चढ़ी होगी। इसमें कोई दो राय नहीं की प्रदेश में विकास तो काफी हो रहा है लेकिन किस कीमत पर। जितनी संख्या पर वृक्ष कटे, उतनी ही संख्या में अगर पौधरोपण किया जाये तो शायद इस दुख को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
कुमारहट्टी के समीप बड़ोग सुरंग (टनल) ने तो आश्चर्य ही में डाल दिया। लगभग 936 मीटर लंबी सुरंग में वाहन चलाना रोमांच से कम नहीं था। हालांकि, इस सुरंग ने शिमला आने-जाने का समय काफी कम कर दिया। इस पहाड़ी प्रदेश में लंबी सुरंग एक अद्भुत आश्चर्य था। वहीं चौड़ी सड़कें एक अचम्भा-सा दिख रहा था। पिछले पांच-दस सालों में सड़कें पहले के मुकाबले काफी चौड़ी हुईं। लेकिन इस प्रदेश की प्राकृतिक तरीके से सौंदर्यीकरण की जरूरत है। हां, जो आनंद इस प्रकृति के बीच रह कर, निहार कर, घूम कर है, वह और कहीं नहीं। यह प्रकृति प्रेमी ही महसूस कर सकता है। आप भी एक बार शिमला घूमने जरूर जायें, आसपास प्रकृति के सौंदर्य को जरूर देखें। हो सके तो शिमला से सटे कुछ दूर बाहर हटकर देखें।



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Emmett527
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