• Lifestyle

    डिज़िटल होता परिवार

    ‘यार … ओके (OK) पर क्लिक कर। अरे बुद्धू तेरे को समझ नहीं आती। मैं क्या कह रहा हूं।’ मां पास आकर बच्चे को समझाती है। ‘बेटा आराम से समझा, उसे नहीं समझ आ रही होगी। अब तेरी तरह एक्सपर्ट थोड़े ही है।’ उत्तर में बच्चा मां से कहता है, ‘मम्मी मैं दोस्त को कब से समझा रहा हूं समझता ही नहीं है। कैसे एप में ज्वाइन होना है।’ पड़ोस में एक बच्चे की बातें सुनकर मुझे हंसी भी आयी और मैं उसकी इन बातों का मजा भी ले रहा था। सोचने लगा कि कोरोना ने आज सबको डिजिटल करने की सोच रखी है। हमें तो कोरोना का अहसानमंद होना…

  • Nature

    कोई लौटा दे बीते हुए दिन

    यह सच है कि बीते हुए दिन वापस तो नहीं आ सकते। लेकिन उन यादों को जरूर ताजा किया जा सकता है। हमारा छोटा-सा परिवार। हम दोनों भाइयों की शादी के बाद परिवार बड़ा हो गया। बहन भी शादी के बाद ससुराल चली गई। मैं भी रोजगार के चक्कर में बाहर चला गया। अब घर जाना साल में एक बार ही हो पाता है। वह भी तब जब बच्चों की स्कूल में जून महीने में छुट्टियां हो जाती हैं। तब वही पहाड़ और गर्मी से राहत के लिए अपना मकान याद आता है। अपना दो मंजिला मकान आज भी है। शायद मकान को बने सौ साल से ऊपर हो गये…

  • Creative,  Lifestyle

    कोरोनाकाल, कुछ खट्टा कुछ मीठा

    कोरोना महामारी 2019 में शुरू हुई तो नाम भी कोविड-19 जुड़ गया। इससे जुड़े लॉकडाउन, कर्फ्यू, अनलॉक, मास्क, सैनेटाइजर, वेंटिलेटर इत्यादि नाम अब जैसे रोजमर्रा के शब्द बन गये हैं। कोरोनाकाल ने एक भयावह स्थिति पैदा कर दी है। रोजगार चले गये। बेरोजगारी बढ़ गयी। रोज कमाने वाला घर बैठा है। मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा-चर्च सब बंद पड़े हैं। अगर कहीं नौकरी बची है तो वहां भी तनख्वाह आधी या थोड़ी मिल रही है। ऐसे काल की किसी ने भी कल्पना नहीं की होगी। लेकिन फिर भी सभी उम्मीद के साथ जी रहे हैं कि एक दिन कोरोना समाप्त होगा। नयी सुबह जरूरी होगी।

  • Lifestyle

    घर की मास्टरनी

    जब से कोरोना महामारी फैली है, सारे कामकाज रुक गये हैं। स्कूल-कॉलेज तो बिल्कुल बंद हैं। सरकारी ऑफिस में कर्मचारियों की उपस्थिति भी कम ही है। प्राइवेट सेक्टर में तो नौकरियां या तो खत्म कर दी है या फिर कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसा नहीं है। हाल यह है कि सब ओर हालात ठीक नहीं है।

  • Creative

    बड़ा आशियाना, छोटा दायरा

    अक्सर देखा होगा कि बड़े-बड़े मकानों के अंदर सजावटी सामान रखा होता है जो देखने में तो अच्छे लगते ही हैं लेकिन हल्का-सा धक्का लगने पर नीचे गिरने पर चकनाचूर हो जाते हैं। महंगा सजावटी सामान मेहमान या आने वालों को दिखाने के लिये ही होता है। घरवाले तो रोज ही देखते हैं। शायद देख-देखकर मन ही मन सुकून भी पाते होंगे। खैर, कौन नहीं चाहेगा कि उसके आशियाने में अच्छा सजावटी सामान भरा हो। देखने वाले उसकी तारीफ में कसीदे कसें। आप उस सामान की कीमत या कहां से मंगाया कैसे मुश्किल से आया इत्यादि का ब्योरा देने में जुट जाते हैं।

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